आज न मालूम हमारा प्रभु क्या करवाने वाला है हमसे? क्योंकि मेरी भाषा में हम क्या है ? हमें नहीं मालूम हमारे मन में जिज्ञासा होती है कि प्रभु तो हमें मिले नहीं है जो हम उनसे भेट करके यह जान ले कि हम क्या है? इसी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए हम पहुंच जाते हैं ए.आई. की शरण में और बात शुरू कर देते है! मेरे ज्ञान के अनुसार हम वह है जिसे हमारे प्रभु ने बनाया है और इस सृष्टि में लाया है यानि सृष्टि कर्ता हमारा रचयिता है और हम न कर्ता है और न अकर्ता ?