Saturday, March 7, 2026
दोनों ही लाजवाब
इतने अच्छे पति पत्नी भी होते हैं हम office की इस तरह से पत्नी को कहानी नहीं सुना सकते लेकिन मान्यवर ने सेवा करते करते पूरी कहानी ही सुना दी बड़े धर्म परायण पति देखिए 🕉
Friday, February 20, 2026
अनंत बनवास
*60 साल... 👆👆कभी सोचा है ये समय कितना लंबा होता है??*
इतने समय में एक बच्चा बूढ़ा हो जाता है। दो पीढ़ियां बदल जाती हैं। दुनिया का नक्शा बदल जाता है।
लेकिन पेशावर (पाकिस्तान) की एक गली में, समय जैसे 1947 में ही थम गया था।
वहां एक दरवाज़ा था—गोरखनाथ मंदिर का। उस पर एक ताला लटका था। उस ताले पर धूल जमती रही, बारिशें होती रहीं, लेकिन वो खुला नहीं।
अंदर देवता अकेले थे। बाहर भक्त लाचार थे।
आज मन कर रहा है कि आपसे इतिहास की नहीं, बल्कि उस 'इंतज़ार' की बात करूँ।
सोचिए ज़रा...
आप अपने घर के मंदिर में रोज़ सुबह दीया जलाते हैं, है ना? अगर कोई आपसे कहे, कि आज के बाद आप यहां 60 साल तक दीया नहीं जला पाएंगे... तो कैसा लगेगा? घबराहट होगी? बेचैनी होगीबस यही बेचैनी सरहद के उस पार, हमारे अपनों के दिलों में थी।
यह मंदिर कोई आम जगह नहीं है।
यह गुरु गोरखनाथ की जगह है। वही गोरखनाथ, जिन्होंने 'नाथ संप्रदाय' की नींव रखी। कहते हैं, यहाँ एक बेरी का पेड़ है और एक पवित्र सरोवर है। लोग मानते हैं कि इस जगह की मिट्टी में आज भी वो तपस्या गूंजती है।
जब देश बंटा, तो ज़मीन बंटी। लोग बंटे। लेकिन आस्था? वो कैसे बंटती?
वो मंदिर अपनी जगह खड़ा रहा, इस उम्मीद में कि कभी तो वो दरवाज़ा खुलेगा। कभी तो कोई आएगा जो 'अलख निरंजन' पुकारेगा।
और फिर... साल 2011 आया।
वो तारीख शायद कैलेंडर में एक आम तारीख थी, लेकिन सनातनी इतिहास में वो 'दिवाली' से कम नहीं थी।
अदालत का आदेश आया और 60 साल पुराना वो जंग लगा ताला टूट गया।
मैं वहां मौजूद नहीं था, लेकिन मैं महसूस कर सकता हूँ उस पल को।
जब वो भारी दरवाज़ा चरमराते हुए खुला होगा... तो अंदर की हवा बाहर आई होगी। वो हवा, जो 60 सालों से अंदर कैद थी। उसमें पुरानी अगरबत्तियों की महक होगी, सूखे फूलों की गंध होगी, और एक खामोश शिकायत होगी—"इतनी देर क्यों कर दी?"
वहां मौजूद लोगों की आँखों में जो आंसू थे, वो खुशी के नहीं थे। वो एक 'रिहाई' के आंसू थे।
जैसे किसी ने बरसों से रोके हुए सांस को छोड़ा हो।
आज का सच .....
आज वहां फिर से घंटी बजती है। शिवरात्रि पर मेला लगता है।
हम यहाँ भारत में बैठकर अक्सर भूल जाते हैं कि हमारी विरासत की जड़ें कितनी गहरी और कितनी दूर तक फैली हैं।
पेशावर का गोरखनाथ मंदिर हमें बस एक ही बात याद दिलाता है—
सरहदें इंसान खींचते हैं, ईश्वर नहीं।
दीवारें खड़ी की जा सकती हैं, लेकिन जिस 'ऊर्जा' से हम जुड़े हैं, उसे कोई दीवार नहीं रोक सकती।
मुझे याद है, मेरे दादा अक्सर कहते थे—"बेटा, मंदिर पत्थर का नहीं होता, भाव का होता है।"
आज समझ आया कि वो सही थे। अगर पत्थर का होता, तो 60 साल की वीरानी में खंडहर बन गया होता। वो 'भाव' ही था जिसने उसे जिंदा रखा।
हम खुशकिस्मत हैं, कि हम अपनी संस्कृति को खुली हवा में जी रहे हैं।
लेकिन कभी-कभी, बस एक पल निकालकर, उन मंदिरों को भी याद कर लेना चाहिए जो सरहद के उस पार, हमारी यादों के दीये जलने का इंतज़ार कर रहे हैं।http://atulgaur.weebly.com
क्योंकि विरासत नक्शों में नहीं, हमारे दिलों में धड़कती है।
एक छोटा सा निवेदन:
अगर इस कहानी ने आपके दिल को कहीं छू लिया हो, तो इसे आगे ज़रूर बढ़ाएं। शायद यह पढ़कर किसी और को अपनी जड़ों की याद आ जाए।
*जय गुरू गोरखनाथ जी*
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Saturday, February 7, 2026
Tuesday, February 3, 2026
Saturday, January 24, 2026
shiv
Shiv
आज न मालूम हमारा प्रभु क्या करवाने वाला है हमसे? क्योंकि मेरी भाषा में हम क्या है ? हमें नहीं मालूम हमारे मन में जिज्ञासा होती है कि प्रभु तो हमें मिले नहीं है जो हम उनसे भेट करके यह जान ले कि हम क्या है? इसी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए हम पहुंच जाते हैं ए.आई. की शरण में और बात शुरू कर देते है! मेरे ज्ञान के अनुसार हम वह है जिसे हमारे प्रभु ने बनाया है और इस सृष्टि में लाया है यानि सृष्टि कर्ता हमारा रचयिता है और हम न कर्ता है और न अकर्ता ?
Wednesday, December 24, 2025
हमारे प्रभु का सजग भारत
. प्रभु ने हमारी क्षमताओं के अनुसार हमको ज्ञान दिया हम उसके व अपने बुजुर्गो के ऋृणि है
Friday, November 21, 2025
Sunday, February 16, 2025
Thursday, October 6, 2022
Sunday, August 9, 2020
Saturday, August 8, 2020
Thursday, July 9, 2020
Friday, April 17, 2020
Saturday, December 8, 2018
Sunday, November 25, 2018
Saturday, November 24, 2018
प्यार ही प्यार
प्यार को प्यारे ही उलझाते हैं
एक तरफ प्यार दूसरी तरफ प्यारे नजर आते हैं
ऐसे में त्याग को जो गले लगाते हैं
प्यार व प्यारे दोनों को पा जाते हैं
एक तरफ प्यार दूसरी तरफ प्यारे नजर आते हैं
ऐसे में त्याग को जो गले लगाते हैं
प्यार व प्यारे दोनों को पा जाते हैं
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